Karna Pishachini Siddhi

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Karna Pishachini Siddhi , ” Sab Log Is Duniya Mein Kisi Na Kisi Kaaran Vash Pareshaan Hote Hain. Sabhi Ko Yah Jaanane Ki Utsukata Hoti Hai Ki Adrshy Duniya Mein Kya Kya Chhupa Hua Hai. Aapake Lie Yah Jaan Lena Zaroori Hai Ki Tab Bhi Log Tantr Mein Bhaag Nahin Lete Kyoonki Aisi Vidyaen Khataranaak Hoti Hain.

Karna Pishachini Siddhi

इनमें आप पाएंगे की लोग एक बार तो उत्साह से जाते हैं पर उसके बाद में अगर बुरे असर से परेशान नहीं हुए तो एक बुद्धि वाला जुआ बतलायेंगे। तंत्र मंत्र यन्त्र में कईं बार ऐसी साधनायें की जाती हैं जिनसे आप अदृश्य दुनिया से नाता बना सकते हैं, लोगों के दिल में छुपी बात जान सकते हैं और जो नहीं दिखता है वहां से जो दिखता है उस दुनिया पर असर पैदा कर सकते हैं।

कर्ण पिशाचिनी सिद्धि प्रयोग

1.कर्ण पिशाचिनी साधना कोई आसान या फिर सरल एवं सहज साधना नहीं हैं। आप पाएंगे की लोग इसको करने के पश्चात पागल हो गए हैं, घर-व्यवहार में तबाही पा चुके हैं और बहुत सी परेशानियों से क्षतिग्रस्त हुए हैं। आप अगर किसी मंत्र में दीक्षित नहीं हैं या फिर गुरु की शरण में नहीं गए हैं तो इस साधना को नहीं करने के सुझाव को उत्तम और सबसे बड़ी बात मान लें।

2. कर्ण पिशाचिनी साधना में आप एक पिशाच से ताल्लुक रखेंगे, इसमें आप एक ऐसी आत्मा से बात करेंगे जो अपने जीवन से गुज़र चुकी है पर उसकी मृत्यु के पश्चात् उसे मोक्ष नहीं मिला है। वह तब इस स्थिति में एक सिद्धी युक्त बिना शरीर का पिशाच या पिशाचिनी बन जाती है। आप जब इनसे साधना करके काम लेंगे तो वह आपको सामने वाले के मन की बात तक को आपके कान में कह जायेगा। ऐसी सिद्धि से आप समझ ही गए होंगे की विफलता पर कितने गलत परिणाम भी हो सकते होंगे।

अगर आप अब भी ऐसे पिशाच के साथ प्रयोग करना चाहते हैं तो फिर ऐसा करें की निम्नलिखित कार्य करें

यह प्रयोग लगातार ग्यारह दिनों तक किया जाता है और इसमें आप बीच में नहीं रुकते हैं। पहले एक कांच की बनी थाली लें उसमें लाल सिन्दूर से त्रिशूल का आकर बना दें। इस अभी बने त्रिशूल की विधि विधान से सही समय पर – दिन और रात में – पूजा करें तो आपका काम बनेगा। मंत्र है

“ ॐ नम: कर्णपिशाचिनी अमोघ सत्यवादिनि मम कर्णे अवतरावतर अतीता नागतवर्त मानानि दर्शय दर्शय मम भविष्य कथय-कथय ह्यीं कर्ण पिशाचिनी स्वहा “

आगे यह है की गाय का देसी घी लें और उसका दिया जलाएं – ११०० बार मंत्र को जपें इसके सामने, ध्यान रहे थाली भी सामने हो। अब घी एवं तेल लेकर उनका एक दिया जलाएं और फिर से ११०० बार मंत्र जाप करें। इस तरह से ग्यारह दिन तक रोज़ दो बार दिये जलाकर मन्त्रों का जाप कर लेंगे तो कर्ण पिशाचिनी मंत्र सिद्ध हो जायेगा। इसके पश्चात आप जब भी कोई सवाल मन में सोचेंगे तो उसका जवाब आपको पिशाच लाकर कान में तुरंत सुना देगा।

इस मंत्र को कभी किसी के सामने मौखिक रूप से बोलना अच्छा नहीं होता। गोपनीयता से साधना करने पर ही सिद्ध होगा आपका कार्य। अगर आपको कहीं पर लगे की कार्य में बाधा आ रही है तो आप उसको धैर्य से सुलझाएं, कभी मोह या क्रोध में लीन होकर यह कार्य नहीं करें अन्यथा आप मौसमी मिजाज़ में गलत सलत कार्य कर देंगे और फिर सोचेंगे की कार्य संपन्न क्यों नहीं हुआ। अगर आपसे कोई इस साधना के बारे में साधना के दौरान पूछे तो फिर आप उसे जवाब में यह कहें की आप केवल भगवन में भरोसा रखते हैं और उन्हीं की शरण में सारे कार्य करते हैं।

कर्ण पिशाचिनी सिद्धि

अगला प्रयोग जो हम आपके प्रत्यक्ष प्रस्तुत करने जा रहे हैं वह और जटिल है – आपको यह कार्य एक बार सुबह और एक बार शाम को करना होगा। रात के समय किसी अच्छे मुहूर्त को यह कार्य शुरू करें। सबसे पहले शमशान की राख, काली हकीक की माला ले आएं, ये आपको किसी भी सुनार के यहाँ मिल जाएगी और राख आप शमशान के किसी नौकर से मंगवा लें। काले रंग के कपडे पहन लें, आसन जिस पे पूजा होगी उसपर भी काला कपडा बिछा दें।

आम पाटे पर अबीर की एक परत बिछा दें, अब अनार की एक लकड़ी लें और उस पर १०८ बार यह मंत्र लिखें और मिटा दें – “ ॐ नम: कर्णपिशाचिनी मातः कारिणी प्रवेसः अतीतानागतवर्तमानानि सत्यं कथन स्वाहा “ जब आप लिखे मिटायें तब ११०० बार यही मंत्र जपें भी। यह कार्य २१ दिन तक रोज़ इसी तरह तक करते रहे। जब आप सोएं तो अकेले सोएं, सिरहाने पर पाटा रखें। कोई और आपके साथ में न सोये।

यह कार्य अगर आपने पूरा कर लिया तो फिर आप जो भी शंका मन में सोचेंगे वह पिशाच आकर दूर कर देगा, जो प्रश्न पूछेंगे उसका सही उत्तर मिलेगा। मगर साधना के वक़्त यह कार्य गोपनीय रखना ज़रूरी है, किसी को मत बताएं की आप क्या कर रहे हैं और ध्यान से यह कार्य निष्ठापूर्वक करें तो फल मिलेगा। अगला तरीक़ा है की आप गाय का गोबर ले लें और उसमें काला नमक मिला दें, इसके बाद इससे वह कमरा लीप देँ जहाँ ये साधना करेंगे। जब वह सूख जाये तो आप हल्दी, चन्दन, अक्षत और कुमकुम से कुश घास का आसन बना लें। अब किसी भी रुद्राक्ष की माला पर इस मन्त्र का जाप करें –

ॐ ह्शो ह्सा नमोहः भग्वतिह् कर्णपिशाचिनी चंडवेगिनी स्वहः

यह जाप अगर आप ११ दिन तक १० हज़ार बार रोज़ कर पाएं तो यह साधना सिद्ध हो जाती है, इसमें कोई संदेह नहीं की यह कार्य मुश्किल है पर इसका उपयोग भी उतना ही निराला है। आप अगर इस विधि को नहीं कर पाते तो पिछली दो विधियों में से कोई एक लेकर उसे करने की कोशिश करें। इसमें कोई संदेह नहीं रखना चाहिए की यह साधना गुरु के संपर्क में करना सबसे अच्छा माना जाता और

अगर गुरु नहीं तो फिर आप किसी अच्छे तांत्रिक से दीक्षा लेकर फिर मंत्र जपें और प्रयोग करें – उन्हें पहले साफ़ साफ़ बतायें की आप क्या करना चाहते हैं और फिर हल मांगे। अगर आप इस साधना में सिद्ध होते हैं तो आपके बहुत से काम बन सकते हैं।

 

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