Kaamdev Vashikaran Mantra

Kaamdev Vashikaran Mantra

Kaamdev Vashikaran Mantra , ” Hindu Dharm Grantho Mein Kaamadev Ko Prem Aur Kaam Ka Devata Maana Gaya Hai, Inaka Roop Ati Aakarshak Aur Sammohan Se Bhara Hai. Maana Jaata Hai Ki Yah Kisi Ko Bhi Aakarshit Kar Sakate Hai. Prem Mein Saphalata Aur Sukhad Daampaty Jeevan Ke Liye Inaki Pooja Karane Ka Vidhaan Hai. Kaamadev Prem Ke Devata Maane Jaate Hai . Unaka Vivaah Prem Aur Aakarshan Ki Devi Rati Se Hua Hai.

जिस तरह पश्चिमी देशों में क्यूपिड और यूनानी देशों में इरोस को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, उसी तरह हिन्दू धर्म ग्रंथों में कामदेव को प्रेम और अकार्षण का देवता कहा जाता है। कामदेव को मनुष्यों में कामेच्छा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी माना गया हैं। शास्त्रो में कामदेव के आशीर्वाद के लिए एक मन्त्र दिया है जिसको सिद्ध करने से जातक सभी का प्रिय हो जाता है , उसका प्रेम , उसका बंधन अटूट रहता है ।

Kaamdev Vashikaran Mantra

कामदेव का मन्त्र :- “ऊँ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात‍्।”

कामदेव के उपरोक्त मन्त्र का नित्य जाप करने से सम्मोहन शक्ति जाग्रत होती है सामने वाला व्यक्ति जातक के प्रति आकर्षित होता है, जातक सर्वत्र लोकप्रियता प्राप्त करता है । इस मंत्र से प्रेम में सफलता , सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है। दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है ।

वैसे जीवन में प्रेम और अपनापन उम्र के हर अवसर पर महत्वपूर्ण माना गया है। आकर्षक व्यक्तिव, ह्रदय की सुन्दरता और प्रेम से जातक सबके ह्रदय में अपने लिए स्थान बना लेता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र हैं। शास्त्रो में कुछ स्थानों में उन्हें हिंदू देवी श्री के पुत्र और कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न, का अवतार भी कहा गया हैं । कामदेव का स्वरूप युवा और आकर्षक है।

कामदेव धनुष को धारण करते है जो पुष्पो से बना हुआ है, जिसमें मधुमक्खियों के शहद की रस्सी लगी है । इसका एक कोना काम में स्थिरता एवं दूसरा कोना चंचलता का प्रतीक है।

शास्त्रो के अनुसार कामदेव के तीर इतने सटीक है कि वह जब कमान से तीर छोड़ते हैं, तो उसकी आवाज नहीं होती और न ही शिकार को संभलने का मौका देते है।

कामदेव वशीकरण मंत्र

कामदेव के धनुष उनके तीर का लक्ष्य विपरीत लिंगी होता है। इसी विपरीत लिंगी आकर्षण से बंधकर पूरी सृष्टि का संचालन होता है। कामदेव का एक लक्ष्य खुद काम है जो पुरुष का प्रतीक है, जबकि दूसरा लक्ष्य रति हैं, जो स्त्री जाति का प्रतीक हैं।

वसंत, कामदेव के परम मित्र माने गए है इन्ही के दिन बसन्त पंचमी के दिन कामदेव की पूजा की जाती है।

कामदेव का वाहन हाथी को माना गया है। कुछ जगहों पर कामदेव को तोते पर बैठे हुए भी बताया गया है।

कामदेव के ‘रागवृंत’, ‘अनंग’, ‘कंदर्प’, ‘मनमथ’, ‘मनसिजा’, ‘मदन’, ‘रतिकांत’, ‘पुष्पवान’ तथा ‘पुष्पधंव’ आदि प्रसिद्ध नाम हैं। कामदेव को अर्धदेव या गंधर्व भी कहा जाता है, कहीं-कहीं इन्हें यक्ष की संज्ञा भी दी गई है।

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